Bihar: भागलपुर जिले में इस साल तिलहन की खेती करने वाले किसानों पर मौसम की दोहरी मार पड़ी है। मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान हुई बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने सरसों और तीसी जैसी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। किसानों का क
Bihar: भागलपुर जिले में इस साल तिलहन की खेती करने वाले किसानों पर मौसम की दोहरी मार पड़ी है। मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान हुई बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने सरसों और तीसी जैसी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। किसानों का कहना है कि पहले तेज हवाओं ने सरसों के फूलों को झाड़ दिया और रही-सही कसर बाद में आई आंधी ने पूरी कर दी। अब स्थिति यह है कि किसानों को अपने घर की जरूरत के लिए भी बाजार से महंगा तेल खरीदना पड़ेगा क्योंकि खेतों से लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है।
फसल बर्बादी का कितना हुआ है असर?
जिला कृषि कार्यालय द्वारा तैयार की गई शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, जिले के 11 प्रखंडों की 141 पंचायतों में बड़े पैमाने पर फसलों को नुकसान पहुंचा है। मौसम की इस अनिश्चितता ने छोटे और बड़े सभी किसानों के मनोबल को तोड़ दिया है।
- कुल प्रभावित क्षेत्र: मार्च 2026 के आखिरी हफ्तों में आई आंधी से करीब 22,117.22 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है।
- गंभीर नुकसान: लगभग 5,395 हेक्टेयर क्षेत्र ऐसा चिह्नित किया गया है, जहां 33 प्रतिशत से ज्यादा फसल बर्बाद हो चुकी है।
- मुख्य प्रभावित फसलें: इस आपदा में सरसों, तीसी, गेहूं, मक्का और चना की फसलों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है।
- प्रभावित इलाके: नाथनगर प्रखंड के अजमेरीपुर, बैरिया और राघोपुर जैसी पंचायतों में दलहन और तिलहन की खेती को सबसे ज्यादा क्षति पहुंची है।
मुआजवे और सरकारी मदद को लेकर क्या है अपडेट?
जिला कृषि पदाधिकारी प्रेम शंकर प्रसाद ने बताया है कि 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर किसानों को मुआवजा देने का प्रावधान है। विभाग ने इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पटना मुख्यालय और आपदा प्रबंधन विभाग को भेज दी है ताकि प्रभावितों को राहत दी जा सके।
- अंतिम सर्वे रिपोर्ट के आधार पर पात्र किसानों को कृषि इनपुट सब्सिडी या अन्य सरकारी सहायता दी जाएगी।
- भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राज्य के कृषि मंत्री को पत्र लिखकर जल्द मुआवजा दिलाने की मांग की है।
- किसानों ने सरकार से मांग की है कि तिलहन फसलों के लिए उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया जाए और स्थानीय स्तर पर खरीद केंद्र खोले जाएं।
- खेती की बढ़ती लागत और आवारा पशुओं की समस्या के कारण किसान अब तिलहन की खेती से दूरी बनाने लगे हैं, जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है।