Bihar: भागलपुर और नवगछिया के बीच विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने से आम लोगों को काफी परेशानी हो रही थी। सड़क संपर्क टूटने के कारण यात्रियों, छात्रों और किसानों को नदी पार करने में दिक्कत आ रही थी। अब इस समस्या को दूर
Bihar: भागलपुर और नवगछिया के बीच विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने से आम लोगों को काफी परेशानी हो रही थी। सड़क संपर्क टूटने के कारण यात्रियों, छात्रों और किसानों को नदी पार करने में दिक्कत आ रही थी। अब इस समस्या को दूर करने के लिए सांसद पप्पू यादव और जिला प्रशासन ने मिलकर निशुल्क नाव सेवा शुरू की है ताकि जरूरतमंद लोग आसानी से आवाजाही कर सकें।
सांसद पप्पू यादव की घोषणा और नावों की सुविधा
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने भागलपुर से नवगछिया के लिए 5 निशुल्क नावों की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि ये नावें विशेष रूप से छात्रों, मरीजों, किसानों और गरीब लोगों के लिए चलाई जाएंगी। यह सेवा तब तक जारी रहेगी जब तक विक्रमशिला सेतु की मरम्मत पूरी नहीं हो जाती और यातायात फिर से शुरू नहीं हो जाता। सांसद ने नाव माफिया द्वारा लिए जा रहे भारी किराए और पुल की मरम्मत में देरी पर नाराजगी भी जताई है।
जिला प्रशासन की सरकारी नाव सेवा और समय
भागलपुर जिला प्रशासन ने भी जनता के लिए सरकारी नाव सेवा शुरू की है। यह सेवा सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक उपलब्ध रहेगी, जिसमें यात्रियों से कोई किराया नहीं लिया जाएगा। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने सुरक्षा मानकों की निगरानी के लिए निर्देश दिए हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि सेतु ठीक होने तक लोगों को वैकल्पिक रास्ता मिलता रहे और उन्हें आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।
किसानों के लिए विशेष व्यवस्था
जिलाधिकारी ने किसानों की सुविधा के लिए एक ‘विशेष नाव सेवा’ शुरू की है। इसके तहत सुबह के समय दो बड़ी नावें चलाई जाएंगी जो पूरी तरह मुफ्त होंगी। इन नावों का इस्तेमाल किसान दूध की केन और सब्जियों की टोकरियां ले जाने के लिए कर सकेंगे। इससे शहर में जरूरी सामान की सप्लाई नहीं रुकेगी और किसानों को अपना सामान ले जाने में आसानी होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
निशुल्क नाव सेवा का समय क्या है?
जिला प्रशासन द्वारा संचालित सरकारी नाव सेवा सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक उपलब्ध है, जिसमें यात्रियों को कोई किराया नहीं देना होगा।
किसानों के लिए क्या खास इंतजाम किए गए हैं?
किसानों के लिए सुबह दो बड़ी विशेष नावें चलाई जा रही हैं, ताकि वे दूध और सब्जियों की टोकरियां बिना किसी खर्च के सुरक्षित तरीके से नदी पार ले जा सकें।