Bihar: भागलपुर के ऐतिहासिक घंटाघर की वह पुरानी घड़ी एक बार फिर से टिक-टिक करने लगी है जिसे 1886 में स्विट्जरलैंड से मंगवाया गया था। कई सालों से बंद पड़ी इस घड़ी को नगर निगम ने अपनी मेहनत से दोबारा चालू कर दिया है। शहर की
Bihar: भागलपुर के ऐतिहासिक घंटाघर की वह पुरानी घड़ी एक बार फिर से टिक-टिक करने लगी है जिसे 1886 में स्विट्जरलैंड से मंगवाया गया था। कई सालों से बंद पड़ी इस घड़ी को नगर निगम ने अपनी मेहनत से दोबारा चालू कर दिया है। शहर की पहचान मानी जाने वाली इस ऐतिहासिक विरासत के फिर से शुरू होने से स्थानीय लोगों में काफी खुशी है।
घड़ी को ठीक करने में कितना समय लगा और कैसे हुई मरम्मत
इस जटिल मैकेनिकल घड़ी को दोबारा चालू करने के लिए भागलपुर नगर निगम ने छह दिनों तक लगातार काम किया। घड़ी के पुराने और खराब पुर्जों को बदलने के लिए कोलकाता से नए पार्ट्स मंगवाए गए। इस पूरी मरम्मत प्रक्रिया में स्थानीय कारीगरों ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई और तकनीकी दिक्कतों को दूर किया।
भागलपुर के लिए क्यों खास है यह घंटाघर
- यह घड़ी साल 1886 में स्विट्जरलैंड से लाई गई थी।
- यह शहर की एक पुरानी और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है।
- स्थानीय लोग इसे भागलपुर की पहचान का एक हिस्सा मानते हैं।
- नगर निगम के प्रयासों से अब यह विरासत फिर से जीवित हो गई है।