Bhagalpur में गंगा और कोसी का जलस्तर बढ़ा, तटबंधों पर बढ़ा खतरा; CWC ने जारी किया अलर्ट

Bhagalpur: पहाड़ों और मैदानी इलाकों में हो रही लगातार बारिश का असर अब सिल्क सिटी भागलपुर में दिखने लगा है। गंगा और कोसी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच भीषण कटाव और बाढ़

Bhagalpur: पहाड़ों और मैदानी इलाकों में हो रही लगातार बारिश का असर अब सिल्क सिटी भागलपुर में दिखने लगा है। गंगा और कोसी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच भीषण कटाव और बाढ़ का डर बैठ गया है। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए अलर्ट जारी किया है।

9 जुलाई 2026 को नवगछिया अनुमंडल में नदियों की स्थिति चिंताजनक है। इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटों में 2 सेंटीमीटर बढ़ा है और यह अब 26.00 मीटर पर बह रही है। वहीं रंगरा चौक प्रखंड के मदरौनी में कोसी नदी के जलस्तर में भी 2 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह 27.08 मीटर तक पहुँच गई है। हालांकि, खरीक प्रखंड के चोरहर क्षेत्र में कोसी का जलस्तर 28.85 मीटर पर स्थिर है।

केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने जल संसाधन विभाग को चेतावनी दी है कि गुरुवार और शुक्रवार को मुंगेर, सुल्तानगंज, भागलपुर और कहलगांव में गंगा का जलस्तर काफी ज्यादा बढ़ सकता है। इस खतरे को देखते हुए बिहार के जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने सुरक्षा कार्यों का निरीक्षण किया है और सभी संबंधित अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा है। उन्होंने इस्माइलपुर-बिंदटोली तटबंध पर कटाव रोकने के काम को 15 दिनों के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है।

बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, भागलपुर ने भी संभावित बाढ़ से निपटने के लिए फ्लड फाइटिंग की पूरी तैयारी कर ली है। मुख्य अभियंता ई. जयप्रकाश पासवान ने रंगरा चौक प्रखंड के ज्ञानी दास टोला में चल रहे कटाव निरोधी कार्यों का जायजा लिया है। वहीं कटिहार के बरारी प्रखंड के काढ़ागोला घाट पर भी गंगा के बढ़ते स्तर से कटाव शुरू हो गया है, जिसकी जानकारी बीडीओ धीरेन्द्र कुमार धीरज ने विभाग को दी है।

सबसे ज्यादा खतरा उन इलाकों में है जहाँ सुरक्षात्मक तटबंध नहीं हैं। मदरौनी में तटबंध न होने की वजह से सधुआ और चापर जैसे दर्जनों गांवों में बाढ़ आने की आशंका है। ममलखा गांव और गोपालपुर-इस्माइलपुर तटबंध पर कटाव रोकने का 80% काम पूरा होने का दावा किया गया है, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने काम की क्वालिटी पर सवाल उठाए हैं। अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान है, जिससे जलस्तर और बढ़ सकता है।