Bhagalpur के स्वतंत्रता सेनानी सियाराम सिंह ने ऐसे छकाया था अंग्रेजों को, 6 घंटे तक भूसे के ढेर में रहे छिपे
Bhagalpur: बिहार के भागलपुर जिले के तिलकपुर गांव में जन्मे सियाराम सिंह एक ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की आजादी के लिए लगा दिया। उन्हें शेर-ए-बिहार और अंग क्षेत्र का दूसरा कुंवर सिंह भी कहा जाता है। उ
Bhagalpur: बिहार के भागलपुर जिले के तिलकपुर गांव में जन्मे सियाराम सिंह एक ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की आजादी के लिए लगा दिया। उन्हें शेर-ए-बिहार और अंग क्षेत्र का दूसरा कुंवर सिंह भी कहा जाता है। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ कई बड़े आंदोलनों में हिस्सा लिया और अपनी बहादुरी से ब्रिटिश हुकूमत की नाक में दम कर दिया था।
सियाराम सिंह ने अपनी शुरुआती पढ़ाई तिलकपुर के स्कूल से की और आगे की शिक्षा TNB College से ली। हालांकि पढ़ाई के दौरान ही वे आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे। उन्होंने कांग्रेस के असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई। इस वजह से 1930 से 1932 के बीच उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा और भारी जुर्माना भी भरना पड़ा।
जब जयप्रकाश नारायण ने आजाद दस्ता बनाने का आह्वान किया, तब उन्होंने सियाराम दल का गठन किया। यह दल सरकारी अधिकारियों के लिए आतंक बन गया था। इस दल ने कई जगहों पर समानांतर सरकारें बनाईं और उन परिवारों की मदद की जिन्हें सरकारी अफसर प्रताड़ित करते थे। 29 अगस्त 1943 को सियाराम दल और पार्थ ब्रह्मचारी दल ने 150 साथियों के साथ सोनबरसा थाना पर हमला किया था, लेकिन यह अभियान सफल नहीं रहा और इसमें सात लोग शहीद हो गए।
अंग्रेजों से बचने की उनकी कहानियां आज भी मशहूर हैं। एक बार जब उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई, तो उन्होंने आखिरी इच्छा के तौर पर दही-चूड़ा खाने और गंगा स्नान करने की मांग की। स्नान के दौरान उन्होंने जंजीरें तोड़कर भागने में कामयाबी हासिल की। भागते समय जब अंग्रेजों ने उन्हें दोबारा घेरा, तो वे भवनाथपुर गांव में एक भूसे के ढेर में 6 घंटे तक छिपे रहे। सांस लेने के लिए उन्होंने बांस का एक खोल बनाया था।
ऐसी ही एक घटना 10 जनवरी 1944 को रन्नूचक मकन्दपुर में हुई जब सशस्त्र पुलिस दस्ते ने उन्हें घेर लिया और वे फिर से घंटों भूसे के ढेर में छिपे रहे। एक अन्य मौके पर वे बसंतपुर गांव में करीब 10 दिनों तक भूखे-प्यासे भूसे के ढेर में छिपे रहे थे।
हालिया घटनाक्रम की बात करें तो मई 2024 में सियाराम सिंह स्मृति मंच ने तिलकपुर में उनका स्मारक बनाने और गंगा सेतु का नाम उनके नाम पर रखने की मांग की है। इस मामले में अनुमंडल पदाधिकारी सदर ने सीओ को जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। वहीं अक्टूबर 2025 में सामाजिक संस्था स्वाभिमान ने उनकी 120वीं जयंती मनाई थी।