Bihar: भागलपुर के रहने वाले इंजीनियर देवनंदन कुमार सिंह की मौत इराक में एक हमले में हो गई थी. अब उनका परिवार मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है. इस कागज के बिना परिवार क
Bihar: भागलपुर के रहने वाले इंजीनियर देवनंदन कुमार सिंह की मौत इराक में एक हमले में हो गई थी. अब उनका परिवार मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है. इस कागज के बिना परिवार को बैंक के जरूरी कामों में काफी दिक्कत आ रही है.
क्या है पूरा मामला और परिवार की परेशानी
देवनंदन कुमार सिंह Bravo Shipping Company में एडिशनल चीफ इंजीनियर थे. 12 मार्च 2026 को इराक के बुसरा बंदरगाह पर हुए एक आत्मघाती नाव हमले में उनकी जान चली गई. उनका पार्थिव शरीर 2 अप्रैल 2026 को भागलपुर पहुंचा, जहां उनका अंतिम संस्कार हुआ. अब उनकी पत्नी कुमकुम सिन्हा और बच्चों को बैंक संबंधी कार्यों के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र की जरूरत है, लेकिन उन्हें यह मिल नहीं रहा है.
नगर निगम और नियमों की उलझन
भागलपुर नगर निगम का कहना है कि विदेश में हुई मौत का प्रमाण पत्र स्थानीय स्तर पर जारी नहीं किया जा सकता. नियमों के मुताबिक, अगर किसी भारतीय की विदेश में मौत होती है, तो उसकी जानकारी संबंधित भारतीय दूतावास (Embassy) में दर्ज होनी चाहिए. परिवार को इराक में मृत्यु प्रमाण पत्र तो मिल गया था, लेकिन भारत में उसकी मान्यता को लेकर समस्या आ रही है.
जरूरी दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया
विदेश में हुई मृत्यु के मामले में निम्नलिखित प्रक्रिया अपनानी होती है:
- मृत्यु का पंजीकरण भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास में कराना होता है.
- इसके लिए पासपोर्ट, स्थानीय मृत्यु प्रमाण पत्र और पोस्टमार्टम रिपोर्ट जैसे कागज चाहिए होते हैं.
- दूतावास से मिले प्रमाण पत्र को विदेश मंत्रालय (MEA) से ‘अपोस्टाइल’ (Apostille) कराना पड़ता है.
- यह प्रमाणीकरण होने के बाद ही कागज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी रूप से वैध माना जाता है और बीमा या पेंशन जैसे काम होते हैं.