बिहार के बेगूसराय जिले में शराबबंदी के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. बछवाड़ा थाना क्षेत्र के सिसवा गांव स्थित एक सरकारी स्कूल में शराब माफियाओं ने स्कूल के बंद पड़े शौचालय को अपना गुप्त गोदाम बना लिया था. इस मामले
बिहार के बेगूसराय जिले में शराबबंदी के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. बछवाड़ा थाना क्षेत्र के सिसवा गांव स्थित एक सरकारी स्कूल में शराब माफियाओं ने स्कूल के बंद पड़े शौचालय को अपना गुप्त गोदाम बना लिया था. इस मामले का खुलासा तब हुआ जब चौथी कक्षा के एक मासूम छात्र ने शौचालय में रखी शराब को गलती से पानी या कोल्ड ड्रिंक समझकर पी लिया और वह नशे की हालत में घर पहुंचा.
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कैसे हुआ घटना का खुलासा और बच्चे की हालत अब कैसी है?
यह घटना 6 अप्रैल 2026 को सिसवा गांव के प्राथमिक विद्यालय में हुई. 11 साल का छात्र मोहम्मद शोएब स्कूल परिसर के जर्जर शौचालय के पास गया था, जहां शराब की पेटियां छिपाई गई थीं. बच्चे ने बोतल से शराब पी ली और जब वह नशे में धुत होकर घर पहुंचा, तो उसकी मां रिजवाना खातून और चाचा मोहम्मद खुर्शीद दंग रह गए. पूछताछ में बच्चे ने स्कूल में रखी बोतलों के बारे में बताया. बच्चे को तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है.
पुलिस की छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?
परिजनों और ग्रामीणों द्वारा हंगामा किए जाने के बाद बछवाड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्कूल के पुराने शौचालय की तलाशी ली. पुलिस की इस कार्रवाई में अवैध शराब का बड़ा जखीरा बरामद किया गया है. घटना से जुड़ी जानकारी नीचे दी गई है:
| विवरण |
जानकारी |
| बरामद शराब की मात्रा |
लगभग 204 लीटर विदेशी शराब |
| बरामद कार्टन |
12 से 25 कार्टन के बीच |
| स्कूल का नाम |
प्राथमिक विद्यालय, सिसवा |
| थानाध्यक्ष का नाम |
परेंद्र कुमार |
स्कूल प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर क्या है अपडेट?
विद्यालय के प्रधानाध्यापक मोहम्मद मुर्सालीन ने बताया कि उन्हें ग्रामीणों से सूचना मिलने के बाद ही इस बात की जानकारी मिली कि स्कूल के शौचालय का इस्तेमाल शराब रखने के लिए हो रहा था. पुलिस ने अज्ञात शराब तस्करों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है. थानाध्यक्ष परेंद्र कुमार ने कहा है कि शराब माफिया के गिरोह की पहचान कर ली गई है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है. इस घटना ने बिहार में शराबबंदी कानून को लागू करने के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और स्थानीय लोग पुलिस की भूमिका को लेकर भी नाराज हैं.