Ayushman Arogya Mandir के स्वास्थ्य कर्मियों की होगी ट्रेनिंग, दिल्ली में नेशनल प्रोग्राम पूरा, अगस्त से देशभर में शुरू होगा कोर्स

Delhi: केंद्र सरकार ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAMs) में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने दिल्ली के नेशनल

Delhi: केंद्र सरकार ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAMs) में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने दिल्ली के नेशनल हेल्थ सिस्टम रिसोर्स सेंटर (NHSRC) में दो दिनों का नेशनल ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (NToT) प्रोग्राम पूरा किया। इस ट्रेनिंग का मकसद सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले मरीजों को बेहतर और क्वालिटी इलाज दिलाना है।

इस कार्यक्रम की शुरुआत स्वास्थ्य मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव और एनएचएम की मिशन डायरेक्टर श्रीमती आराधना पटनायक ने की। उन्होंने कहा कि पब्लिक हेल्थकेयर में लोगों का भरोसा बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों का कुशल होना और उनकी क्वालिटी सर्टिफिकेशन बहुत जरूरी है। इसके लिए सरकार ने विकेंद्रीकृत मॉडल के जरिए ट्रेनिंग देने पर जोर दिया है। इससे पहले 30 अप्रैल 2026 को चंडीगढ़ में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने ‘इंटीग्रेटेड ट्रेनिंग स्ट्रेटजी’ (ITS) और अलग-अलग कैडर के लिए ट्रेनिंग मॉड्यूल लॉन्च किए थे। अब इस नई रणनीति के तहत ट्रेनिंग का ध्यान केवल किताबी ज्ञान पर नहीं, बल्कि मरीज की जरूरतों और काम करने के तरीके (Competency-based) पर होगा।

इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में देशभर से 110 से ज्यादा नेशनल ट्रेनर्स और मास्टर ट्रेनर्स ने हिस्सा लिया। इसमें क्लासरूम पढ़ाई के साथ-साथ केस स्टडी और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर (NIHFW) के स्किल लैब में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दी गई।

इस ट्रेनिंग का लाभ उन पांच श्रेणियों के कर्मियों को मिलेगा जो जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं देते हैं:

  • मेडिकल ऑफिसर (Medical Officers)
  • स्टाफ नर्स (Staff Nurses)
  • कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHOs)
  • ऑक्सिलरी नर्स मिडवाइव्स (ANMs)
  • एक्रेडिटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट (ASHAs)

अब इस ट्रेनिंग को पूरे देश में फैलाने की तैयारी है। अगस्त 2026 से देश के 100 से ज्यादा रीजनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के जरिए इसे कैस्केड मोड में लागू किया जाएगा। इससे यूपी, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के ग्रामीण इलाकों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की क्वालिटी में सुधार होगा और अलग-अलग स्वास्थ्य प्रोग्राम्स के बीच बेहतर तालमेल बनेगा।