Ayodhya में राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी बैठक, चंदा घोटाले और इस्तीफों पर होगी चर्चा
UP/Ayodhya : अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बेहद जरूरी बैठक 6 जुलाई 2026 को दोपहर 3 बजे हुई। यह मीटिंग चंदे में हुई कथित गड़बड़ी और ट्रस्ट के कुछ बड़े अधिकारियों के इस्तीफे जैसे गंभीर मुद्दों को
UP/Ayodhya : अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बेहद जरूरी बैठक 6 जुलाई 2026 को दोपहर 3 बजे हुई। यह मीटिंग चंदे में हुई कथित गड़बड़ी और ट्रस्ट के कुछ बड़े अधिकारियों के इस्तीफे जैसे गंभीर मुद्दों को सुलझाने के लिए बुलाई गई थी। इस बैठक का मुख्य मकसद मंदिर के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और विवादों को खत्म करना था।
ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai और ट्रस्टी Anil Mishra ने नैतिक आधार पर अपने इस्तीफे सौंप दिए थे, जिस पर इस बैठक में फैसला लिया जाना था। साथ ही, यूपी सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय SIT की अंतरिम रिपोर्ट पर भी चर्चा हुई। SIT इस घोटाले की जांच कर रही है और अब तक चंदा गिनने के काम से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच का दायरा अब बैंक अधिकारियों तक भी बढ़ गया है।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष Swami Govind Dev Giri ने साफ किया कि उनका काम सिर्फ ऑडिटेड खातों का रिकॉर्ड रखना था और वे रोजाना के वित्तीय लेनदेन या चंदे के प्रबंधन में शामिल नहीं थे। उन्होंने मांग की कि घोटाले के दोषियों को कड़ी सजा मिले, चाहे वे किसी भी पद पर हों। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में चंदे की निगरानी के लिए डिजिटल सिस्टम और सख्त नियम बनाए जाएं।
मंदिर प्रशासन ने अब चंदा गिनने के नियमों को और कड़ा कर दिया है। नए नियमों के मुताबिक:
- गिनती करने वाले स्टाफ के लिए बिना जेब वाली गहरे नीले रंग की वर्दी अनिवार्य होगी।
- स्टाफ की दो बार सुरक्षा जांच की जाएगी।
- गिनती हॉल के अंदर मोबाइल फोन और निजी सामान ले जाना पूरी तरह मना होगा।
- पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए फ्लोर-बेस्ड काउंटिंग सिस्टम लागू किया गया है।
बैठक में मंदिर के पेशेवर प्रबंधन के लिए एक CEO नियुक्त करने पर भी विचार हुआ। इसके अलावा, पिछले पांच साल के खर्चों और चंदे का नया ऑडिट कराया जाएगा। इस पूरे मामले ने राजनीतिक मोड़ ले लिया है, जहां विपक्ष स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है और बीजेपी इसे आस्था का राजनीतिकरण बता रही है।