Mumbai में परमाणु युग की शुरुआत के 70 साल, Apsara रिएक्टर ने भारत को बनाया था एशिया का पहला परमाणु देश

Maharashtra: मुंबई के ट्रॉम्बे में स्थित Bhabha Atomic Research Centre (BARC) ने भारत को परमाणु युग में लाने वाले पहले रिएक्टर Apsara के 70 साल पूरे कर लिए हैं। 4 अगस्त 1956 को दोपहर 3:45 बजे इस रिएक्टर ने अपनी पहली सफलत

Maharashtra: मुंबई के ट्रॉम्बे में स्थित Bhabha Atomic Research Centre (BARC) ने भारत को परमाणु युग में लाने वाले पहले रिएक्टर Apsara के 70 साल पूरे कर लिए हैं। 4 अगस्त 1956 को दोपहर 3:45 बजे इस रिएक्टर ने अपनी पहली सफलता हासिल की थी। यह न केवल भारत बल्कि पूरे एशिया का पहला परमाणु रिएक्टर था, जिसने देश की वैज्ञानिक क्षमता को दुनिया के सामने रखा था।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि की नींव डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने रखी थी, जिन्हें भारतीय परमाणु कार्यक्रम का जनक माना जाता है। उन्होंने 1955 में इसका डिजाइन तैयार किया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस रिएक्टर का नाम ‘अप्सरा’ रखा और 20 जनवरी 1957 को इसे औपचारिक रूप से देश को समर्पित किया। नेहरू जी ने एक बार इसकी तुलना एलीफेंटा गुफाओं से करते हुए कहा था कि जीवन के महत्वपूर्ण तत्वों को समझने के लिए इन दोनों का महत्व है।

Apsara रिएक्टर का मुख्य काम वैज्ञानिकों को ट्रेनिंग देना, न्यूट्रॉन फिजिक्स के प्रयोग करना और रेडियोआइसोटोप बनाना था। इसे बनाने में ब्रिटेन ने शुरुआती ईंधन के रूप में 6 किलो यूरेनियम की मदद की थी। इसके अलावा मुंबई की लोकल इंडस्ट्रीज जैसे चिनचपोकली की New Standard Engineering Company और Mazagon Dock ने भी इसमें जरूरी उपकरण दिए थे। राजा रमन्ना और एम.आर. श्रीनिवासन जैसे विशेषज्ञों ने इसके विकास में बड़ी भूमिका निभाई थी।

समय के साथ इस तकनीक को और बेहतर किया गया। मूल Apsara रिएक्टर को 2009 में बंद कर दिया गया था, लेकिन 10 सितंबर 2018 को इसका अपग्रेडेड वर्जन ‘Apsara-U’ चालू किया गया। यह नया रिएक्टर पहले से ज्यादा क्षमता वाला है और इसका इस्तेमाल मेडिकल क्षेत्र के लिए रेडियोआइसोटोप बनाने में हो रहा है, जिससे इलाज की सुविधाएं बढ़ी हैं।

अब इस ऐतिहासिक धरोहर को आम लोगों के लिए खोला जा रहा है। 7 अगस्त 2023 से BARC के ट्रॉम्बे कैंपस में पुराने Apsara रिएक्टर को एक पब्लिक म्यूजियम में बदलने का काम शुरू हुआ है। नेहरू साइंस सेंटर के सहयोग से बन रहे इस म्यूजियम के जरिए लोग भारत के परमाणु सफर को करीब से देख सकेंगे।