Antarctica में शिकागो शहर जितना बड़ा बर्फ का टुकड़ा टूटा, मुंबई और न्यूयॉर्क जैसे तटीय शहरों पर मंडराया खतरा
World: अंटार्कटिका के जॉर्ज VI आइस शेल्फ से A-84 नाम का एक विशाल हिमखंड टूटकर अलग हो गया है। यह बर्फ का टुकड़ा इतना बड़ा है कि इसकी तुलना अमेरिका के शिकागो शहर से की जा रही है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की ब
World: अंटार्कटिका के जॉर्ज VI आइस शेल्फ से A-84 नाम का एक विशाल हिमखंड टूटकर अलग हो गया है। यह बर्फ का टुकड़ा इतना बड़ा है कि इसकी तुलना अमेरिका के शिकागो शहर से की जा रही है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की बर्फ पिघलने से समुद्र का जलस्तर बढ़ सकता है, जिससे मुंबई और न्यूयॉर्क जैसे समुद्र किनारे बसे बड़े शहरों को खतरा हो सकता है।
इस घटना की आधिकारिक पुष्टि 31 जनवरी 2025 को U.S. National Ice Center (USNIC) ने की थी। जानकारी के मुताबिक यह हिमखंड 13 जनवरी 2025 को टूटा था। USNIC ने बताया कि A-84 की लंबाई 16 नॉटिकल मील और चौड़ाई 9 नॉटिकल मील है। यह टुकड़ा अंटार्कटिका के उस हिस्से से अलग हुआ जिसे बेलिंगशौसेन/वेडेल सी क्षेत्र कहा जाता है।
इस घटना के बाद वैज्ञानिकों को एक बड़ा मौका मिला। बर्फ हटने से समुद्र की सतह का लगभग 510 वर्ग किलोमीटर इलाका सामने आ गया, जो सालों से बर्फ की मोटी परत के नीचे छिपा था। Schmidt Ocean Institute के रिसर्च जहाज R/V Falkor (too) ने वहां जाकर जांच की। वहां के वैज्ञानिकों को समुद्र की गहराई में एक अनोखी दुनिया मिली।
रिसर्च टीम ने पाया कि बिना सूरज की रोशनी के भी वहां कई तरह के जीव फल-फूल रहे हैं। वहां बड़े स्पंज, कोरल, समुद्री मकड़ियाँ और ऑक्टोपस जैसे जीव मिले, जिनमें से कुछ विज्ञान के लिए बिल्कुल नए हो सकते हैं। ये जीव करीब 150 मीटर मोटी बर्फ के नीचे दशकों या शायद सैकड़ों सालों से रह रहे थे।
जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि अंटार्कटिका की बर्फ की चादर हर साल करीब 150 अरब टन की रफ्तार से कम हो रही है। हालांकि बर्फ का टूटना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन बढ़ता तापमान इसे तेज कर रहा है। इससे दुनिया भर में समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर भारत के मुंबई जैसे तटीय इलाकों पर पड़ेगा।