Finance : एक युवा पिता अपनी नई नौकरी और परिवार के बीच उलझा हुआ था। उसे Mumbai में एक अच्छी नौकरी का मौका मिला, लेकिन घर पर उसका तीन महीने का बच्चा और पत्नी थी। इस मुश्किल घड़ी में मशहूर उद्यमी Ankur Warikoo ने उसे एक ऐसी
Finance : एक युवा पिता अपनी नई नौकरी और परिवार के बीच उलझा हुआ था। उसे Mumbai में एक अच्छी नौकरी का मौका मिला, लेकिन घर पर उसका तीन महीने का बच्चा और पत्नी थी। इस मुश्किल घड़ी में मशहूर उद्यमी Ankur Warikoo ने उसे एक ऐसी सलाह दी है, जो करियर और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हर व्यक्ति के काम आ सकती है।
युवा पिता की क्या थी मुश्किल स्थिति
वह व्यक्ति फिलहाल एक ऐसी नौकरी में था जहां नाइट शिफ्ट थी और इससे उसकी सेहत खराब हो रही थी। मुंबई की नई नौकरी में सैलरी ज्यादा थी, ग्रोथ अच्छी थी और नाइट शिफ्ट भी नहीं थी। लेकिन समस्या यह थी कि उसे मुंबई जाना पड़ता और अपनी पत्नी और छोटे बच्चे से दूर रहना पड़ता, क्योंकि उसकी पत्नी अपनी थीसिस पूरी कर रही थी। साथ ही, मुंबई में रहने का खर्च ज्यादा होने के कारण उसकी बचत भी कम हो जाती।
Ankur Warikoo ने क्या सलाह दी
Warikoo ने उस पिता को सलाह दी कि वह इन दोनों विकल्पों में से किसी को भी न चुनें। उन्होंने कहा कि हमें केवल उन मौकों के पीछे नहीं भागना चाहिए जो हमारे पास आते हैं, बल्कि अपनी प्राथमिकताओं और लंबे समय के लक्ष्यों के आधार पर फैसले लेने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि व्यक्ति को साहस दिखाकर एक ‘Option C’ यानी तीसरा रास्ता निकालना चाहिए, जो उसकी जरूरतों और इच्छाओं के हिसाब से सही हो।
मौके और जरूरत के बीच का अंतर
Ankur Warikoo ने यह सवाल उठाया कि क्या उस व्यक्ति ने खुद उस कंपनी में आवेदन किया था या नौकरी का ऑफर उसके पास आया। उन्होंने समझाया कि अक्सर लोग ‘उपलब्धता’ को ‘सही चुनाव’ समझ लेते हैं। उनके मुताबिक, करियर का फैसला इरादे से होना चाहिए, न कि सिर्फ इसलिए कि कोई मौका मिल गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Ankur Warikoo ने मुंबई की नौकरी के मामले में क्या सुझाव दिया
उन्होंने सुझाव दिया कि उपलब्ध दो विकल्पों (पुरानी नौकरी या नई मुंबई की नौकरी) में से किसी को चुनने के बजाय, व्यक्ति को अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर एक तीसरा विकल्प (Option C) तैयार करना चाहिए।
युवा पिता के सामने मुख्य चुनौतियां क्या थीं
मुख्य चुनौतियां नाइट शिफ्ट के कारण खराब सेहत, मुंबई जाने पर परिवार से दूर रहना और वहां के महंगे खर्चों के कारण बचत में कमी आना था।