Bhiwandi में Amazon वेयरहाउस सील होने से 500 लोग बेरोजगार, यूनियन ने लेबर कमिश्नर से की शिकायत
Maharashtra: ठाणे के भिवंडी में Amazon के एक वेयरहाउस को सील किए जाने के बाद वहां काम करने वाले करीब 500 लोग बेरोजगार हो गए हैं। इस कार्रवाई के बाद ‘प्लेटफॉर्म ऐप बेस्ड एंड अदर कॉमर्स वर्कर्स यूनियन’ ने लेबर
Maharashtra: ठाणे के भिवंडी में Amazon के एक वेयरहाउस को सील किए जाने के बाद वहां काम करने वाले करीब 500 लोग बेरोजगार हो गए हैं। इस कार्रवाई के बाद ‘प्लेटफॉर्म ऐप बेस्ड एंड अदर कॉमर्स वर्कर्स यूनियन’ ने लेबर कमिश्नर और FDA कमिश्नर के पास शिकायत दर्ज कराई है। यूनियन का कहना है कि इस फैसले से लोडर, पिकर और डिलीवरी करने वाले कर्मचारियों की रोजी-रोटी छिन गई है।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने वेयरहाउस में एक्सपायर्ड सामान बेचने के आरोपों के बाद वहां का फूड लाइसेंस रद्द कर दिया। 25 जून 2026 को लाइसेंस सस्पेंड किया गया था और 1 जुलाई को इसे पूरी तरह रद्द कर दिया गया। इसके बाद 7 अगस्त 2026 को वेयरहाउस को सील कर दिया गया, जिससे काम अचानक रुक गया।
बॉम्बे हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने सोमवार को Amazon Retail India को निर्देश दिया कि वह वेयरहाउस में मौजूद सभी एक्सपायर्ड सामानों की लिस्ट बनाए और उन्हें नष्ट करने के लिए FDA को सौंपे। इस पूरी प्रक्रिया का खर्च भी Amazon को ही उठाना होगा। कोर्ट ने पहले FDA की इस कार्रवाई को बहुत सख्त बताते हुए कहा था कि एजेंसी ‘मच्छर मारने के लिए तलवार’ का इस्तेमाल कर रही है और उसे अधिक व्यवस्थित तरीका अपनाना चाहिए।
यूनियन ने अपनी मांगों में कुछ जरूरी बदलाव मांगे हैं ताकि भविष्य में मजदूरों को ऐसी परेशानी न हो:
- अगर 50 से ज्यादा मजदूरों के रोजगार पर असर पड़ने वाला हो, तो लाइसेंस रद्द करने से 7 दिन पहले लेबर विभाग और यूनियन को सूचना दी जाए।
- एक ‘वर्कर प्रोटेक्शन फंड’ बनाया जाए, जिसमें कंपनियां पैसा डालें ताकि सस्पेंशन के दौरान मजदूरों को 50% वेतन मिल सके।
- लेबर विभाग, FDA और यूनियन की एक संयुक्त कमेटी बनाई जाए जो कार्रवाई से पहले मजदूरों की सुरक्षा की जांच करे।
यूनियन का आरोप है कि यह कार्रवाई महाराष्ट्र मान्यता ट्रेड यूनियन और अनुचित श्रम व्यवहार अधिनियम, 1971 और कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट का उल्लंघन है। हाई कोर्ट ने FDA को 27 अगस्त 2026 तक अपना हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।