Lucknow में वकीलों पर दर्ज हैं सैकड़ों आपराधिक मामले, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फर्जी डिग्रीधारकों पर FIR के दिए आदेश
UP/Lucknow: उत्तर प्रदेश की न्याय व्यवस्था में एक बड़ा खुलासा हुआ है। लखनऊ के एक ही थाने में सैकड़ों वकीलों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज मिले हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है और फ
UP/Lucknow: उत्तर प्रदेश की न्याय व्यवस्था में एक बड़ा खुलासा हुआ है। लखनऊ के एक ही थाने में सैकड़ों वकीलों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज मिले हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है और फर्जी डिग्री के आधार पर वकालत करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश बार कौंसिल के सचिव को निर्देश दिया है कि जिन 105 वकीलों की डिग्रियां फर्जी पाई गई हैं, उनके खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की FIR दर्ज कराई जाए। कोर्ट ने चिंता जताई कि कुछ जिला न्यायालयों में लॉ ग्रेजुएट्स के ऐसे गिरोह सक्रिय हैं, जो लोगों को डराने-धमकाने और अवैध कब्जे खाली कराने जैसे काम कर रहे हैं।
लखनऊ के वजीरगंज थाना क्षेत्र में स्थिति सबसे ज्यादा खराब मिली है, जहां 422 वकीलों के खिलाफ 236 आपराधिक मामले दर्ज हैं। प्रदेश भर के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 5,14,439 पंजीकृत वकीलों में से 4,157 वकीलों पर 5,056 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से कुछ वकील ऐसे भी हैं जिन पर 11 से ज्यादा FIR दर्ज हैं और एक वकील के खिलाफ तो 46 मामले दर्ज मिले हैं।
| मुख्य बिंदु | कोर्ट का निर्देश/आंकड़ा |
|---|---|
| फर्जी डिग्रीधारक वकील | 105 वकीलों पर FIR दर्ज करने का आदेश |
| गंभीर अपराधों के मामले | मामलों को 100 किमी दूर दूसरे जिले में ट्रांसफर किया जाएगा |
| लाइसेंस पर कार्रवाई | आरोपपत्र दाखिल होने पर प्रैक्टिस लाइसेंस निलंबित होगा |
| पुलिस वेरिफिकेशन | वकालत शुरू करने से पहले पुलिस सत्यापन अनिवार्य होगा |
| कुल आपराधिक मामले | प्रदेश के 4,157 वकीलों पर 5,056 केस दर्ज |
| अगली सुनवाई | 20 अगस्त 2026 को अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई है |
हाई कोर्ट ने यह भी कहा है कि अब से वकीलों का पुलिस वेरिफिकेशन उसी तरह अनिवार्य होगा जैसे डॉक्टर या शिक्षकों के लिए होता है। साथ ही जिला न्यायाधीशों और पुलिस अधिकारियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था बनाई जाएगी ताकि अपराधियों पर समय रहते लगाम कसी जा सके। यह पूरी कार्रवाई इटावा के वकील मोहम्मद कफील की याचिका के बाद शुरू हुई है।