Lucknow में वकीलों की ‘गुंडागर्दी’ पर हाईकोर्ट सख्त, पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत पेश होने का आदेश

UP/Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी में वकीलों द्वारा की गई कथित गुंडागर्दी और मारपीट की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कई वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है

UP/Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी में वकीलों द्वारा की गई कथित गुंडागर्दी और मारपीट की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कई वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है। कोर्ट ने साफ किया है कि कानून के रखवाले अगर खुद कानून तोड़ेंगे, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मामला लखनऊ के ऐशबाग इलाके का है, जहाँ 7 जुलाई 2026 को दयानंद सेवा संस्थान की एक विवादित संपत्ति पर वकीलों के एक समूह ने कथित तौर पर हमला किया। वायरल वीडियो में वकील परिसर में जबरन घुसते, कर्मचारियों से मारपीट करते और सीसीटीवी कैमरे तोड़ते नजर आए। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि मौके पर 15 पुलिसकर्मी चार घंटे तक मौजूद थे, लेकिन वे वकीलों के प्रति काफी मित्रवत दिखे और कोई कार्रवाई नहीं की। कोर्ट ने संयुक्त पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त और सहायक पुलिस आयुक्त को 23 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। इस मामले में अमित मिश्रा, राहुल शुक्ला और दीपक प्रकाश समेत कई वकीलों के नाम सामने आए हैं।

इसके अलावा, 21 जुलाई 2026 को जिला अदालत परिसर के अंदर दिल्ली से आए तीन वकीलों और उनके मुवक्किल मोहम्मद शाकिर पर स्थानीय वकीलों ने हमला किया। कोर्ट ने इसे न्याय प्रशासन में सीधा हस्तक्षेप बताते हुए बहुत गंभीर मामला माना है। सीसीटीवी फुटेज में मुवक्किल के साथ मारपीट होते दिखी है। इस घटना में सेंट्रल बार एसोसिएशन के कनिष्ठ उपाध्यक्ष सौरभ कुमार वर्मा का नाम आया है, जिन पर पहले से तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। कोर्ट ने उनकी संपत्ति के ब्योरे और आपराधिक इतिहास की जानकारी मांगी है और दिल्ली के वकीलों को सुरक्षा देने का निर्देश दिया है।

वकालत के पेशे में बढ़ते अपराधों पर न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने भी गंभीर टिप्पणी की है। आंकड़ों के मुताबिक, यूपी बार काउंसिल में पंजीकृत 5.14 लाख वकीलों में से 4,157 पर कुल 5,056 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 418 वकीलों पर तीन या उससे ज्यादा केस चल रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 105 वकीलों की डिग्रियां फर्जी पाई गईं। कोर्ट ने इन फर्जी डिग्रीधारकों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की एफआईआर दर्ज करने और जघन्य अपराधों में शामिल वकीलों का लाइसेंस निलंबित करने का निर्देश दिया है। अकेले लखनऊ के वजीरगंज थाने में 422 वकीलों के खिलाफ 236 मामले दर्ज हैं।