Lucknow में 50 हजार फाइनल रिपोर्ट लंबित, हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, सभी जिला जजों से मांगी रिपोर्ट

Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पुलिस द्वारा दाखिल की गई फाइनल रिपोर्टों के सालों तक लंबित रहने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे न्यायिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक और सिस्टम की बड़ी विफलता बताया है। इस मा

Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पुलिस द्वारा दाखिल की गई फाइनल रिपोर्टों के सालों तक लंबित रहने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे न्यायिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक और सिस्टम की बड़ी विफलता बताया है। इस मामले में कोर्ट ने अब उत्तर प्रदेश के सभी जिला और सत्र न्यायाधीशों से जवाब मांगा है।

न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि फाइनल रिपोर्टों को वर्षों तक लंबित रखने से आपराधिक न्याय प्रणाली पर बुरा असर पड़ता है। इससे आम लोगों और केस से जुड़े पक्षों को बहुत ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है। अकेले लखनऊ की न्यायपालिका में लगभग 50,000 अंतिम रिपोर्टें निपटान के इंतजार में पड़ी हैं।

यह पूरा मामला असित वर्मा और एक अन्य व्यक्ति द्वारा दायर आवेदन के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि गोसाईंगंज पुलिस स्टेशन में 11 जुलाई 2020 को ही फाइनल रिपोर्ट दाखिल हो गई थी, लेकिन छह साल बाद भी उस पर कोई अंतिम आदेश नहीं हुआ। इस देरी की वजह से उन्हें विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट रिन्यू कराने में भी दिक्कतें आ रही हैं।

कोर्ट ने अब सभी जिला जजों को 20 अगस्त 2026 तक एक विस्तृत रिपोर्ट और एक्शन प्लान जमा करने का निर्देश दिया है। इस रिपोर्ट में निम्नलिखित जानकारियां देनी होंगी:

  • अदालत के हिसाब से लंबित फाइनल रिपोर्टों की कुल संख्या
  • रिपोर्ट्स के लंबित रहने का असली कारण
  • अब तक निपटान के लिए क्या कार्रवाई की गई है
  • भविष्य में इन्हें निपटाने के लिए क्या कार्य योजना तैयार की गई है

इस मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 को होगी, जिसमें राज्य भर के जिला जजों द्वारा भेजी गई रिपोर्टों पर विचार किया जाएगा।