UP: बार चुनाव में अब बताना होगा आपराधिक रिकॉर्ड, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ का बड़ा आदेश
UP/Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने वकीलों के चुनाव को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। अब तहसील बार एसोसिएशन, रामसनेही घाट (बाराबंकी) के चुनाव में लड़ने वाले हर उम्मीदवार को अपने आपराधिक रिकॉर्ड की पूरी जानकारी
UP/Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने वकीलों के चुनाव को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। अब तहसील बार एसोसिएशन, रामसनेही घाट (बाराबंकी) के चुनाव में लड़ने वाले हर उम्मीदवार को अपने आपराधिक रिकॉर्ड की पूरी जानकारी देनी होगी। कोर्ट ने यह कदम चुनाव में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया है।
अदालत ने साफ कहा है कि जो भी वकील प्रत्याशी नामांकन पत्र भरेंगे, उन्हें अपने खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मुकदमों का ब्योरा साथ लगाना होगा। हाईकोर्ट ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि वकालत जैसे पेशे में अपराधी और फर्जी डिग्री वाले लोग बढ़ रहे हैं। कोर्ट का मानना है कि अगर इसे नहीं रोका गया तो आम जनता का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा। इसी कड़ी में लखनऊ के वकीलों के खिलाफ एक खुफिया जांच के आदेश भी दिए गए थे, क्योंकि एक व्यक्ति जिस पर आठ केस दर्ज थे, वह सेंट्रल बार एसोसिएशन में कनिष्ठ उपाध्यक्ष के पद पर था।
कोर्ट के निर्देश पर उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने 26 जुलाई 2026 को सभी बार एसोसिएशनों को 15 दिन का समय दिया है। उन्हें उन वकीलों की लिस्ट मांगी गई है जिनके खिलाफ गंभीर अपराधों में केस दर्ज हैं या कोर्ट में ट्रायल चल रहा है। यूपी बार काउंसिल ने चेतावनी दी है कि अगर यह लिस्ट समय पर नहीं मिली तो संबंधित बार एसोसिएशन की संबद्धता रद्द की जा सकती है और वकीलों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा।
इस मामले में पुलिस महानिदेशक (DGP) और लखनऊ पुलिस कमिश्नर को भी निर्देश दिया गया है कि वे चिन्हित वकीलों के खिलाफ एफआईआर और आपराधिक मामलों का विवरण हलफनामे के जरिए कोर्ट में पेश करें। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस आदेश की अनदेखी करने वालों को कोर्ट की अवमानना माना जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि जिला बार एसोसिएशनों के चुनाव उनके अपने नियमों से चलते हैं, इसलिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया या राज्य बार काउंसिल उन्हें सीधे नियंत्रित नहीं कर सकते।