UP: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी प्रवक्ता राजकुमार भाटी की विवादित टिप्पणियों पर कड़ा रुख अपनाया है। अखिलेश यादव ने 17 और 18 मई, 2026 को अपने लखनऊ कार्यालय में भाटी को बुलाकर उनसे मुलाकात की। इस दौरान
UP: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी प्रवक्ता राजकुमार भाटी की विवादित टिप्पणियों पर कड़ा रुख अपनाया है। अखिलेश यादव ने 17 और 18 मई, 2026 को अपने लखनऊ कार्यालय में भाटी को बुलाकर उनसे मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि सार्वजनिक जीवन में भाषा का संयम रखना बहुत जरूरी है।
राजकुमार भाटी के किन बयानों से मचा बवाल?
राजकुमार भाटी ने 13 मई, 2026 को ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ एक बेहद विवादित बयान दिया था, जिसमें उन्होंने ब्राह्मणों की तुलना सेक्स वर्कर से की। इस बात से समाज में काफी गुस्सा फैल गया और गाजियाबाद के कविनगर थाने में उनके खिलाफ FIR दर्ज हुई। इसके ठीक अगले दिन 14 मई को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जाट-गुर्जर समाज की महिलाओं को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी।
अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं को क्या निर्देश दिए?
सपा प्रमुख ने राजकुमार भाटी को व्यवहार में संतुलन बनाने की सलाह दी। उन्होंने पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं को सख्त निर्देश दिए कि वे ऐसी कोई बात न कहें जिससे किसी भी जाति, धर्म या समुदाय की भावनाएं आहत हों। अखिलेश यादव ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए PDA (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक), पीड़ित अगड़े-पिछड़े और महिलाओं को एक साथ जोड़कर चलना होगा।
विवाद के बाद राजनीतिक दलों और नेताओं की क्या प्रतिक्रिया रही?
इस विवाद के बाद कई राजनीतिक दलों ने सपा को घेरा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भाटी को पार्टी से निकालने की मांग की, जबकि बसपा प्रमुख मायावती ने सपा को ब्राह्मण विरोधी बताते हुए अखिलेश यादव से माफी मांगने को कहा। पार्टी के भीतर से भी पूर्व मंत्री पवन पांडे और विधायक अमिताभ बाजपेई ने इन बयानों को अक्षम्य बताया। वहीं, जनपद दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी और सचिव शोभाराम चंदीला ने विरोध में सपा की सदस्यता छोड़ दी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
राजकुमार भाटी के खिलाफ FIR क्यों दर्ज हुई?
राजकुमार भाटी ने 13 मई, 2026 को ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ विवादित टिप्पणी की थी, जिसके बाद गाजियाबाद के कविनगर थाने में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं को क्या समझाया?
अखिलेश यादव ने निर्देश दिया कि कोई भी कार्यकर्ता ऐसी भाषा का इस्तेमाल न करे जिससे किसी समुदाय की भावनाएं आहत हों, ताकि 2027 के चुनाव के लिए सभी वर्गों को एकजुट किया जा सके।