Ahmedabad में Air India विमान हादसे के एक साल बाद बड़ा खुलासा, जमीन पर मरने वालों के लिए मुआवजे का कोई पक्का कानून नहीं

Gujarat: अहमदाबाद के B J Medical College हॉस्टल में पिछले साल 12 जून को Air India की फ्लाइट AI 171 गिरी थी। इस भयानक हादसे में विमान में सवार 242 में से 241 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि जमीन पर मौजूद 19 लोग भी मारे गए थे।

Gujarat: अहमदाबाद के B J Medical College हॉस्टल में पिछले साल 12 जून को Air India की फ्लाइट AI 171 गिरी थी। इस भयानक हादसे में विमान में सवार 242 में से 241 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि जमीन पर मौजूद 19 लोग भी मारे गए थे। इनमें चार मेडिकल छात्र भी थे जो अपने हॉस्टल की मेस में खाना खा रहे थे। हादसे के एक साल बाद अब यह बात सामने आई है कि विमान के यात्रियों और जमीन पर मरने वालों के लिए मुआवजे के नियम बिल्कुल अलग हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय कानूनों में जमीन पर मौजूद पीड़ितों के लिए मुआवजे का कोई तय ढांचा नहीं है। विमान के यात्रियों को ‘Carriage by Air Act’ और ‘Montreal Convention’ के तहत एक तय सिस्टम से मुआवजा मिलता है, लेकिन जमीन पर मौजूद लोगों के लिए ऐसा कोई कानून नहीं है। फिलहाल जमीन पर मरने वालों के परिवारों को मुआवजा कोर्ट केस, इंश्योरेंस क्लेम या कंपनी द्वारा दी गई मदद (ex gratia) के भरोसे ही मिलता है।

इस गंभीर मुद्दे को देखते हुए Safety Matters Foundation (SMF) ने 14 जून 2026 को नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) को एक चिट्ठी लिखी है। संस्था ने सरकार से मांग की है कि जमीन पर हादसे का शिकार होने वालों के लिए एक कानूनी ढांचा (Ground Victims Compensation Framework) तैयार किया जाए, ताकि उन्हें भी समय पर और तय राशि का मुआवजा मिल सके।

दूसरी तरफ, Air India ने साफ किया है कि वह पीड़ित परिवारों पर अंतिम मुआवजे के लिए कोई दबाव नहीं बना रही है। एयरलाइन के मुताबिक, परिवार जांच रिपोर्ट आने तक इंतजार करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। मुआवजे की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:

विवरण जानकारी
अंतरिम भुगतान (Interim Payment) 96% परिवारों को 25 लाख रुपये दिए गए
टाटा ग्रुप ट्रस्ट की मदद 91% पात्र परिवारों को 1 करोड़ रुपये दिए गए
जांच एजेंसी Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB)
प्रारंभिक कारण टेकऑफ के बाद फ्यूल सप्लाई स्विच ‘CUTOFF’ पर मिले

हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है, लेकिन एक साल पूरा होने पर अधिकारियों ने एक अंतरिम बयान जारी किया है। गुजरात सरकार ने हादसे के तुरंत बाद यह स्वीकार किया था कि उन्होंने जमीन पर मरने वालों के मुआवजे पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया था।