Lucknow में राम मंदिर चंदा चोरी के खिलाफ AAP का प्रदर्शन, ‘भिक्षाटन आंदोलन’ कर मांगा हिसाब

Lucknow: आम आदमी पार्टी (AAP) ने श्रीराम मंदिर चंदे में हुई कथित चोरी और गड़बड़ियों को लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। लखनऊ समेत राज्य के कई जिला मुख्यालयों और प्रमुख चौराहों पर पार्टी कार्यकर्ताओं

Lucknow: आम आदमी पार्टी (AAP) ने श्रीराम मंदिर चंदे में हुई कथित चोरी और गड़बड़ियों को लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। लखनऊ समेत राज्य के कई जिला मुख्यालयों और प्रमुख चौराहों पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने एकत्रित होकर ‘भिक्षाटन आंदोलन’ चलाया। प्रदर्शनकारियों ने ‘चंदा चोरों गद्दी छोड़ो’ के नारे लगाए और ट्रस्ट के अधिकारियों से जवाब मांगा।

यह पूरा विवाद 7 जून 2026 को चंदे में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद शुरू हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) बनाया। इस SIT में संभागीय आयुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार शामिल हैं। SIT ने 17 और 18 जून को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रशासक गोपाल राव से पूछताछ भी की।

इस मामले में अलग-अलग पक्षों के बयानों ने विवाद को और बढ़ा दिया है। जहां चंपत राय ने चोरी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि SBI के साथ आंतरिक ऑडिट चल रहा है, वहीं राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने माना कि दान की सुरक्षा के लिए तय नियमों का 90% पालन नहीं हुआ। उन्होंने इसे ‘चोरी’ और ‘डकैती’ तक कह दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी 20 जून को इस चोरी को ‘महापाप’ बताया और कहा कि कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा।

AAP सांसद संजय सिंह ने इस मामले में और गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए जमीन सौदों में भी करीब 200 करोड़ रुपये की गड़बड़ी हुई है। लखनऊ में प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रीतपाल सिंह ने SIT की जांच पर भरोसा जताने से इनकार किया और मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज की निगरानी में निष्पक्ष जांच हो। उन्होंने इस पूरे घोटाले को 400 से 500 करोड़ रुपये का बताया।

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी इस मामले में हाईकोर्ट के जज द्वारा न्यायिक जांच की मांग की है और इसे संगठित लूट करार दिया है। AAP ने पारदर्शिता की मांग करते हुए चंपत राय को 420 रुपये का एक प्रतीकात्मक डिमांड ड्राफ्ट भेजने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरोसा दिया है कि SIT की जांच 15 दिनों के भीतर पूरी सच्चाई सबके सामने लाएगी।